बीमार ग्रामीणों की सूचना पर हेली से रालम पहुंची मेडिकल टीम, खराब मौसम में पांच दिन गांव में डटी रही
पिथौरागढ़। मुनस्यारी विकासखंड के दुर्गम रालम गांव में बड़ी संख्या में ग्रामीणों के बीमार होने की सूचना मिलते ही स्वास्थ्य विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चिकित्सकीय टीम को गांव भेजा। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. जे.एस. चुफाल के निर्देशन में टीम सात अगस्त को हेली सेवा के माध्यम से रालम पहुंची। यहां विशेष चिकित्सा शिविर लगाकर करीब 70 ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया और जरूरत के अनुसार उन्हें निशुल्क दवाइयां उपलब्ध कराई गईं।
चिकित्सा शिविर के दौरान ग्रामीणों की शुगर, रक्तचाप सहित विभिन्न स्वास्थ्य जांचें की गईं। चिकित्सकों ने जांच रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक उपचार और दवाइयां दीं। इसके साथ ही ग्रामीणों को मौसमी बीमारियों से बचाव के उपायों की जानकारी दी गई। चिकित्सकों ने व्यक्तिगत स्वच्छता, सुरक्षित पेयजल के उपयोग और बीमारी के लक्षण नजर आने पर समय से चिकित्सकीय परामर्श लेने के लिए भी जागरूक किया।
शिविर में डॉ. आशु अवस्थी, डॉ. मृगांक शुक्ला और फार्मेसी अधिकारी जीवन खरायत ने ग्रामीणों को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कीं। वहीं, स्वस्थ हिमालय अभियान सोसाइटी की ओर से ग्राम सभा को आपातकालीन परिस्थितियों में उपयोग के लिए इमरजेंसी फर्स्ट एड किट भी उपलब्ध कराई गई।
खराब मौसम बना वापसी में बाधा
रालम की दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के बीच स्वास्थ्य विभाग की टीम को वापसी में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। सात अगस्त को हेली सेवा से गांव पहुंची टीम की वापसी खराब मौसम के कारण निर्धारित समय पर नहीं हो सकी। मौसम लगातार खराब रहने के चलते हेलीकॉप्टर उड़ान नहीं भर पाया, जिसके कारण चिकित्सकीय टीम को पांच दिन तक गांव में ही रुकना पड़ा।
इस दौरान टीम ने ग्रामीणों के संपर्क में रहते हुए आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं जारी रखीं। विपरीत मौसम और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद चिकित्सकों ने ग्रामीणों को जरूरत के अनुसार उपचार और स्वास्थ्य संबंधी परामर्श दिया। मौसम में सुधार होने के बाद 11 अगस्त को हेली सेवा के माध्यम से टीम की वापसी हो सकी।
स्वास्थ्य विभाग की त्वरित कार्रवाई की ग्रामीणों ने सराहना की। ग्रामीणों ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. जे.एस. चुफाल और पूरी चिकित्सकीय टीम का आभार जताते हुए कहा कि दुर्गम क्षेत्र में समय पर स्वास्थ्य टीम के पहुंचने से बीमार ग्रामीणों को गांव में ही जांच, उपचार और दवाइयां उपलब्ध हो सकीं। इससे उन्हें इलाज के लिए लंबी दूरी तय कर बाहर जाने की परेशानी से भी राहत मिली।
