उत्तरकाशी, 5 अगस्त | चंद्रप्रकाश बहुगुणा
5 अगस्त 2025, दोपहर करीब 2 बजे गंगा की सहायक खीरगंगा ने अचानक रौद्र रूप धारण कर उत्तरकाशी जनपद के प्रमुख पर्यटन स्थल धराली-हर्षिल क्षेत्र में भारी तबाही मचा दी थी। देखते ही देखते घर, होटल, दुकानें और सड़कें मलबे में तब्दील हो गईं। कई परिवारों ने अपने परिजन, आशियाने और आजीविका खो दी।
आज, ठीक एक वर्ष बाद, धराली की तस्वीर बदल चुकी है। जहां कभी मलबा था, वहां अब उम्मीदें हैं। टूटे घरों की जगह नए आशियाने खड़े हैं, पर्यटन फिर से रफ्तार पकड़ चुका है, बागों में सेब की फसल फिर लहलहा रही है और बच्चों की स्कूलों में फिर से चहल-पहल लौट आई है।
राहत से पुनर्वास तक बना मिसाल
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन और जिलाधिकारी प्रशांत आर्य के नेतृत्व में जिला प्रशासन ने राहत एवं पुनर्वास कार्यों को प्राथमिकता देते हुए प्रभावित परिवारों तक हरसंभव सहायता पहुंचाई। प्रशासन का उद्देश्य स्पष्ट था—”पहले जान बचाना, फिर सम्मानजनक पुनर्वास सुनिश्चित करना।”
आपदा में मृतकों के आश्रितों को 4 लाख रुपये की निर्धारित सहायता तथा मुख्यमंत्री राहत कोष से 1 लाख रुपये अतिरिक्त देकर प्रत्येक परिवार को कुल 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की गई। इसके अलावा 19 लापता लोगों को मृत घोषित कर उनके परिजनों को भी नियमानुसार सहायता उपलब्ध कराई गई।
बेघर परिवारों को मिला सहारा
आपदा में पूरी तरह क्षतिग्रस्त 115 मकानों के लिए प्रत्येक परिवार को 5 लाख रुपये की सहायता दी गई, जिस पर कुल 5.75 करोड़ रुपये व्यय किए गए। साथ ही इन 115 परिवारों को छह माह तक 4 हजार रुपये प्रतिमाह किराया सहायता भी उपलब्ध कराई गई।
होटल एवं दुकान संचालकों को अब तक 6.83 करोड़ रुपये से अधिक की आर्थिक सहायता प्रदान की जा चुकी है, जबकि शेष मामलों में सहायता प्रक्रिया जारी है। इसके अलावा 18 घायलों को भी नियमानुसार आर्थिक सहायता दी गई।
भविष्य की आपदाओं से सुरक्षा पर भी जोर
सरकार ने केवल मुआवजा ही नहीं दिया, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं से नुकसान कम करने के लिए स्थायी सुरक्षा कार्य भी शुरू किए।
सिंचाई विभाग ने 384.61 लाख रुपये की लागत से भागीरथी, खीरगाड़ और तेलगाड़ में 15 चैनलाइजेशन, तटबंध और बोल्डर क्रेटिंग कार्य स्वीकृत किए, जिनमें अधिकांश पूरे हो चुके हैं।
लोक निर्माण विभाग ने 88.25 लाख रुपये की लागत से धराली पुल, हर्षिल मार्ग और वैकल्पिक संपर्क मार्गों को पुनर्स्थापित कर आवागमन सामान्य किया।
बागवानों और किसानों को मिला संबल
उद्यान विभाग ने 256 मीट्रिक टन सेब का 1.15 करोड़ रुपये में सरकारी उपार्जन किया। इसके अलावा 18.57 लाख रुपये के कार्टन, बीज एवं कीटनाशकों का वितरण किया गया।
कृषि विभाग ने 274 किसानों को 35 लाख रुपये के कृषि उपकरण और खाद 100 प्रतिशत अनुदान पर उपलब्ध कराए। साथ ही 5.92 लाख रुपये की लागत से स्प्रिंकलर और जियो-टैंक स्थापित किए गए।
आजीविका और आधारभूत सुविधाओं का पुनर्निर्माण
पशुपालन विभाग ने आपदा में मृत 235 पशुओं के लिए 10.94 लाख रुपये का मुआवजा वितरित किया तथा गोट वैली योजना के माध्यम से नई आजीविका के अवसर उपलब्ध कराए।
उरेडा विभाग ने 13.93 लाख रुपये की सोलर लाइटें स्थापित कीं, 1.77 करोड़ रुपये से विद्युत व्यवस्था बहाल की, 2.97 करोड़ रुपये आजीविका पुनर्स्थापना तथा 1.87 करोड़ रुपये खाद्य आपूर्ति व्यवस्था पर खर्च किए। वहीं, राजकीय विद्यालय धराली में 6 लाख रुपये की लागत से स्मार्ट क्लास की सुविधा विकसित की गई।
‘लक्ष्य सिर्फ मुआवजा नहीं, सामान्य जीवन की वापसी’
जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता देना नहीं था, बल्कि प्रभावित परिवारों के जीवन को फिर से सामान्य बनाना और सुरक्षित पुनर्निर्माण सुनिश्चित करना था। उन्होंने कहा कि प्रशासन हर प्रभावित परिवार के साथ खड़ा है और पुनर्वास कार्यों की निरंतर निगरानी की जा रही है।
आपदा से पुनर्जन्म की कहानी
धराली की कहानी अब केवल एक प्राकृतिक आपदा की कहानी नहीं रही। यह उत्तराखंड के साहस, सामूहिक प्रयास और प्रभावी प्रशासनिक नेतृत्व की मिसाल बन चुकी है। एक वर्ष पहले जिसने सब कुछ खो दिया था, वही धराली आज फिर नई उम्मीदों, नए सपनों और नए विकास के साथ आगे बढ़ रहा है। यह पुनर्निर्माण इस बात का प्रमाण है कि दृढ़ इच्छाशक्ति, संवेदनशील शासन और जनसहभागिता से सबसे बड़ी आपदा पर भी विजय पाई जा सकती है।
