तीन दशक से सड़क का इंतजार, 23 अगस्त को नरगोली से बेरीनाग तक बनेगी 8 किमी लंबी मानव श्रृंखला

राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस पर दो जनपदों के ग्रामीण करेंगे शांतिपूर्ण प्रदर्शन, तिरंगे और गाजे-बाजे के साथ उठेगी सड़क के डामरीकरण की मांग

बेरीनाग। पिथौरागढ़ जिले के सीमांत पौसा-पोस्ताला क्षेत्र और बागेश्वर जिले की कमस्यारघाटी की लाइफलाइन माने जाने वाले नरगोली-चंतोला-पौसा-पोस्ताला-बेरीनाग मोटर मार्ग के डामरीकरण और सुधारीकरण की मांग को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। करीब तीन दशक से सड़क के पक्कीकरण की मांग पूरी न होने से नाराज ग्रामीण अब 23 अगस्त को राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के अवसर पर नरगोली से बेरीनाग तक करीब आठ किलोमीटर लंबी मानव श्रृंखला बनाकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करेंगे।

इस आंदोलन में बागेश्वर और पिथौरागढ़ दोनों जिलों के ग्रामीणों के साथ पंचायत प्रतिनिधि, युवा, महिलाएं और विभिन्न क्षेत्रों के लोग शामिल होंगे। ग्रामीणों का कहना है कि देश अंतरिक्ष के क्षेत्र में लगातार नई ऊंचाइयां हासिल कर रहा है, लेकिन सीमांत क्षेत्रों में आज भी लोग सड़क जैसी बुनियादी सुविधा के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इसी अंतर को उजागर करने के लिए राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस पर मानव श्रृंखला का आयोजन किया जा रहा है।

पंचायत घर में हुई बैठक, सौंपी गई जिम्मेदारियां

मानव श्रृंखला की तैयारियों को लेकर पौसा-पोस्ताला पंचायत घर में सड़क संघर्ष समिति के बैनर तले बैठक आयोजित की गई। बैठक में दोनों जिलों के पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने हिस्सा लिया और आंदोलन की रूपरेखा तैयार की। आयोजन को सफल बनाने के लिए कार्यकर्ताओं को अलग-अलग जिम्मेदारियां भी सौंपी गईं।

संघर्ष समिति के अध्यक्ष एवं सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य डीआर टम्टा की अध्यक्षता में हुई बैठक में क्षेत्रवासियों से स्वप्रेरणा से आंदोलन में शामिल होने की अपील की गई। समिति ने कहा कि प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा। मानव श्रृंखला के दौरान तिरंगे झंडों के साथ गाजे-बाजे और नारों के माध्यम से सड़क के डामरीकरण और सुधारीकरण की मांग शासन-प्रशासन तक पहुंचाई जाएगी।

सड़क की बदहाली से रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित

ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की खराब स्थिति का सीधा असर क्षेत्र की आवाजाही, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, कृषि उत्पादों के परिवहन और व्यापारिक गतिविधियों पर पड़ रहा है। बारिश के दौरान सड़क की स्थिति और खराब हो जाती है, जिससे ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ जाती हैं। आरोप है कि करीब तीन दशक से लगातार मांग उठाए जाने के बावजूद सड़क को पक्का करने की दिशा में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।

ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि विधानसभा चुनाव से पहले यदि सड़क के डामरीकरण और सुधारीकरण का काम शुरू नहीं हुआ तो कमस्यारघाटी के ग्रामीण कूलूर नदी में जलसमाधि लेने जैसा कठोर कदम उठाने के लिए मजबूर होंगे।

आंदोलन को बताया सामूहिक आवाज

संघर्ष समिति के संरक्षक एवं पूर्व प्रधानाचार्य मनोहर सिंह रौतेला सहित अन्य पदाधिकारियों ने कहा कि 23 अगस्त का मानव श्रृंखला कार्यक्रम किसी एक व्यक्ति या गांव का आंदोलन नहीं, बल्कि कमस्यारघाटी और दोनों जिलों के सीमांत ग्रामीणों की सामूहिक आवाज है। समिति ने जनप्रतिनिधियों, युवाओं, महिलाओं, व्यापारियों और क्षेत्रवासियों से बड़ी संख्या में शामिल होकर आंदोलन को सफल बनाने का आह्वान किया।

बैठक में गोविंद बल्लभ उपाध्याय, अजय उप्रेती, ग्राम प्रधान भूपाल राम, राजेश बनाई, भगवान राम, भास्कर कुमार, मनोज राठौर, हरीश डसीला, भगवान मेहरा, पूरन सिंह बोरा, भूपाल खाती, मनोज रौतेला, पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य सुनील रावत, महेश राठौर, सुनील रौतेला, पंकज डसीला, मोहित उप्रेती, गोकुल नगरकोटी, राकेश रौतेला, तनूज उप्रेती, प्रवीण रौतेला, दीपक सिंह समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।

ग्रामीणों का कहना है कि तीन दशक से कच्ची और बदहाल सड़क के भरोसे चल रहे क्षेत्र को अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि सड़क के डामरीकरण और स्थायी सुधारीकरण की जरूरत है। 23 अगस्त की मानव श्रृंखला के जरिए ग्रामीण शासन-प्रशासन तक अपनी आवाज पहुंचाकर सड़क निर्माण को लेकर ठोस कार्रवाई की उम्मीद जता रहे हैं।

 

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