देव संस्कृति विश्वविद्यालय की अनूठी पहल, लोकतंत्र और एआई को जोड़कर गढ़ेगा बेहतर भविष्य
डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने दिल्ली में शीर्ष नेताओं से की मुलाकात, अंगदान जागरूकता का भी दिया संदेश
हरिद्वार, 29 मई | चंद्रप्रकाश बहुगुणा
देव संस्कृति विश्वविद्यालय तकनीक और भारतीय संस्कृति के समन्वय के साथ भविष्य निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल कर रहा है। विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने नई दिल्ली में देश के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात कर उन्हें आगामी अंतरराष्ट्रीय विचार मंच में शामिल होने का आमंत्रण दिया।
विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित किए जा रहे अंतरराष्ट्रीय मंच ‘लोकतंत्र के लिए एआई’ का उद्देश्य यह है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का उपयोग केवल तकनीकी विकास तक सीमित न रहकर मानवता, लोकतांत्रिक मूल्यों और सामाजिक कल्याण के लिए हो। इस आयोजन के साथ अखिल विश्व गायत्री परिवार के जन्मशताब्दी वर्ष से जुड़े विशेष कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।
नई दिल्ली प्रवास के दौरान डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, केंद्रीय मंत्री एवं भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जे. पी. नड्डा तथा डॉ. मल्लिका नड्डा से भेंट की। इस दौरान लोकतंत्र, नैतिक मूल्यों पर आधारित एआई, सुशासन, युवा शक्ति और भारतीय ज्ञान परंपरा जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।
डॉ. पण्ड्या ने कहा कि देव संस्कृति विश्वविद्यालय विज्ञान और अध्यात्म के समन्वय के माध्यम से ऐसी तकनीक विकसित करने की सोच रखता है, जिसमें मानवीय संवेदनाएं सर्वोपरि हों। उन्होंने कहा कि एआई ऐसा होना चाहिए जो इंसान को पीछे छोड़ने के बजाय उसकी क्षमताओं को बढ़ाए और समाज में करुणा, ईमानदारी तथा सर्वहित की भावना को मजबूत करे।
इस अवसर पर डॉ. पण्ड्या ने ‘दधीचि अंगदान अभियान’ के लिए भी नेताओं को आमंत्रित किया। अभियान का उद्देश्य लोगों में अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाना और अधिक से अधिक लोगों को जीवनदान के इस महायज्ञ से जोड़ना है।
देव संस्कृति विश्वविद्यालय का मानना है कि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा और आधुनिक तकनीक का समन्वय ही भविष्य के मजबूत, संवेदनशील और समावेशी समाज की नींव बनेगा। विश्वविद्यालय की यह पहल लोकतंत्र को मजबूत करने, तकनीक को मानवीय मूल्यों से जोड़ने और नए भारत की सकारात्मक पहचान स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
