बेरीनाग, प्रदीप महरा।
बेरीनाग नगर और विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल चौकोड़ी के करीब 25 हजार से अधिक निवासियों की तीन दशक पुरानी भूमि समस्या के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। अपर जिलाधिकारी (एडीएम) योगेंद्र सिंह ने चाय बागान के लिए आवंटित भूमि पर सीलिंग संबंधी कार्रवाई के आदेश जारी किए हैं। इसके बाद संबंधित भूमि को राज्य सरकार में निहित करने की प्रक्रिया शुरू होगी। अब अंतिम निर्णय राज्य सरकार को लेना है कि स्थानीय लोगों को भूमि का मालिकाना हक किस प्रकार और किन शर्तों पर दिया जाएगा।
इस निर्णय के बाद बेरीनाग और चौकोड़ी क्षेत्र में खुशी का माहौल है। वर्षों से भूमि का स्वामित्व नहीं होने के कारण लोगों को बैंक ऋण, भवन निर्माण, बिजली-पानी के नए कनेक्शन और कई सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था।
अवैध खरीद-फरोख्त रोकने के लिए कार्रवाई
एडीएम योगेंद्र सिंह ने बताया कि चौकोड़ी-बेरीनाग क्षेत्र की भूमि मूल रूप से चाय बागान के विकास और रोजगार सृजन के उद्देश्य से आवंटित की गई थी। बंदोबस्ती अभिलेखों में यह भूमि चाय बागान के रूप में दर्ज है, इसलिए राज्य सरकार की पूर्व अनुमति के बिना इसका क्रय-विक्रय नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा कि नियमों के विपरीत भूमि की खरीद-फरोख्त होने से मूल उद्देश्य प्रभावित हुआ और अवैध निर्माण को बढ़ावा मिला। इसी कारण वर्ष 2006 में तत्कालीन उपजिलाधिकारी तथा वर्ष 2007 में तत्कालीन जिलाधिकारी ने ऐसी रजिस्ट्रियों पर रोक लगा दी थी। इस कार्रवाई को उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई, लेकिन न्यायालय से भी संबंधित पक्ष को राहत नहीं मिली।
सीलिंग अधिनियम के तहत हो रही जांच
एडीएम के अनुसार वर्तमान में नियत प्राधिकारी न्यायालय, पिथौरागढ़ उत्तर प्रदेश (उत्तराखंड) अधिकतम जोत सीमा आरोपण अधिनियम, 1960 (संशोधित 1972) के तहत उन सभी मामलों की जांच कर रहा है, जहां भूमि का उपयोग निर्धारित उद्देश्य से अलग किया गया है या नियमों के विरुद्ध हस्तांतरण हुआ है।
जांच के बाद ऐसी भूमि को राज्य सरकार में निहित करने की कार्रवाई के लिए उपजिलाधिकारी बेरीनाग को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि इस अभियान का उद्देश्य सरकारी भूमि का संरक्षण, अवैध भूमि कारोबार, अतिक्रमण और स्टाम्प चोरी पर प्रभावी रोक लगाना है, ताकि भविष्य में जनहित और विकास कार्यों के लिए भूमि उपलब्ध रह सके।
25 हजार लोगों को मिलेगा लाभ
बेरीनाग और चौकोड़ी में वर्तमान में लगभग 25 हजार लोग निवास करते हैं। भूमि का स्वामित्व न होने के कारण लोगों को बैंक से ऋण नहीं मिल पाता था और पिछले तीन वर्षों से कई स्थानों पर बिजली और पानी के नए कनेक्शन भी रुके हुए थे।
भूमि का मालिकाना हक लंबे समय से क्षेत्र का प्रमुख राजनीतिक और जन आंदोलन का विषय रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और हरीश रावत के कार्यकाल में इस संबंध में समिति भी गठित की गई थी, जिसने शासन को अपनी रिपोर्ट सौंप दी थी। हालांकि मामला न्यायालय में लंबित होने के कारण सरकार कोई निर्णय नहीं ले सकी।
अब सरकार के पाले में फैसला
एडीएम के आदेश के बाद अब निगाहें राज्य सरकार पर हैं। सरकार को तय करना होगा कि भूमि का मालिकाना हक किस प्रक्रिया से दिया जाएगा, पट्टा या अन्य व्यवस्था अपनाई जाएगी तथा भूमि का मूल्य निर्धारण किस आधार पर होगा। विधानसभा चुनाव से पहले इस मुद्दे पर सरकार के निर्णय को लेकर भी क्षेत्र में चर्चाएं तेज हैं।
2020 में शुरू हुई थी प्रक्रिया
वर्ष 2020 में तत्कालीन उपजिलाधिकारी एवं आईएएस अधिकारी डॉ. सौरभ गहरवार ने भूमि सीलिंग की प्रक्रिया को गति दी थी। स्थानीय स्तर पर अभिलेख भी तैयार कर लिए गए थे, लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण कार्रवाई पूरी नहीं हो सकी।
जनप्रतिनिधियों ने जताया आभार
निर्णय के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी का स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने आभार व्यक्त किया। उनका कहना है कि दोनों नेताओं ने समय-समय पर इस मुद्दे के समाधान के लिए प्रयास किए।
प्रमुख प्रतिक्रियाएं
फकीर राम टम्टा, विधायक:
“बेरीनाग और चौकोड़ी की दशकों पुरानी मांग पूरी होने की दिशा में बड़ा कदम उठा है। इससे क्षेत्र के विकास को नई गति मिलेगी।”
नारायण राम आर्या, दर्जा राज्य मंत्री:
“इस विषय को लेकर कई बार मुख्यमंत्री और राजस्व विभाग से वार्ता की गई। अब सीलिंग की कार्रवाई के बाद लोगों को शीघ्र भूमि का मालिकाना हक दिलाने का प्रयास होगा।”
हेमा पंत, अध्यक्ष नगरपालिका बेरीनाग:
“भूमि का मालिकाना हक मिलने से नगर के विकास कार्यों में तेजी आएगी और लंबे समय से रुकी योजनाएं आगे बढ़ सकेंगी।”
राजेश रावत, अध्यक्ष व्यापार संघ:
“इस फैसले से पर्यटन, व्यापार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।”
मनोज सानी, ग्राम प्रधान चौकोड़ी:
“तीन दशक से चली आ रही लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर पहुंची है। मालिकाना हक मिलने से चौकोड़ी का पर्यटन विकास और तेज होगा।”
