तकनीकी विशेषज्ञों ने उपाध्यक्ष डॉ. चिन्मय पण्ड्या से मुलाकात कर लिया मार्गदर्शन
हरिद्वार, 20 अगस्त। अखिल विश्व गायत्री परिवार की संस्थापिका वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा के जन्मशताब्दी वर्ष के अवसर पर देव संस्कृति विश्वविद्यालय शिक्षा, तकनीक और नवाचार को भारतीय संस्कृति एवं मानवीय मूल्यों से जोड़ने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है। इसी क्रम में विश्वविद्यालय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के क्षेत्र में नई संभावनाओं और तकनीकी नवाचार को लेकर महत्वपूर्ण विचार-विमर्श हुआ।
इनोविशन्स सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड तथा देव संस्कृति विश्वविद्यालय के कंप्यूटर साइंस विभाग के अंतर्गत संचालित ‘इंस्टीट्यूट ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ की टीम एवं तकनीकी विशेषज्ञों ने विश्वविद्यालय के उपाध्यक्ष डॉ. चिन्मय पण्ड्या से मुलाकात की। बैठक में एआई, तकनीकी नवाचार, शिक्षा के क्षेत्र में आधुनिक तकनीक के उपयोग तथा भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप विद्यार्थियों को तैयार करने जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।
इस अवसर पर डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि तकनीक का उद्देश्य केवल सुविधाओं का विस्तार करना नहीं, बल्कि उसे मानव कल्याण, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सामाजिक विकास का माध्यम बनाना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि एआई के क्षेत्र में ऐसे नवाचारों को बढ़ावा देने की आवश्यकता है, जो आधुनिक विज्ञान एवं तकनीकी ज्ञान के साथ भारतीय चिंतन, नैतिक मूल्यों और मानवीय संवेदनाओं को भी साथ लेकर आगे बढ़ें।
उन्होंने कहा कि तेजी से बदलते तकनीकी दौर में विद्यार्थियों को केवल तकनीकी दक्षता तक सीमित रखने के बजाय उनमें रचनात्मक सोच, नैतिक दृष्टिकोण, सामाजिक जिम्मेदारी और नवाचार की भावना विकसित करना भी जरूरी है।
शिक्षा, संस्कार और तकनीक का संगम
देव संस्कृति विश्वविद्यालय का प्रयास शिक्षा को केवल रोजगार और तकनीकी दक्षता तक सीमित न रखकर चरित्र, चेतना, संस्कार और नवाचार से जोड़ने का है। जन्मशताब्दी वर्ष में एआई जैसे आधुनिक और तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्र में हो रहा यह संवाद विश्वविद्यालय के इसी व्यापक दृष्टिकोण को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है।
विश्वविद्यालय के कंप्यूटर साइंस विभाग के अनुसार, बैठक को भविष्य में संयुक्त शोध, तकनीकी नवाचार, प्रशिक्षण और शैक्षणिक सहयोग की संभावनाओं के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे विद्यार्थियों को एआई और उभरती तकनीकों के क्षेत्र में व्यावहारिक ज्ञान एवं नए अवसरों से जोड़ने की दिशा में भी काम किया जा सकेगा।
