Dehradun: मुख्यमंत्री धामी ने लेखकों व साहित्यकारों से किया संवाद, प्रदेश के विकास और सांस्कृतिक संरक्षण पर हुई सार्थक चर्चा

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को देहरादून में प्रदेश के प्रतिष्ठित लेखकों, साहित्यकारों, कवियों और बुद्धिजीवियों के साथ संवाद किया। इस दौरान उत्तराखंड के समग्र विकास, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, साहित्य के संवर्धन तथा नई पीढ़ी को अपनी लोक परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि किसी भी राज्य की पहचान केवल उसके विकास कार्यों से नहीं, बल्कि उसकी संस्कृति, भाषा, साहित्य और परंपराओं से भी होती है। उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति, लोकभाषाएं, लोककला और साहित्य हमारी अमूल्य धरोहर हैं, जिन्हें संरक्षित करना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार साहित्य और संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

संवाद के दौरान साहित्यकारों ने भी राज्य के सांस्कृतिक विकास, लोकभाषाओं के संरक्षण, युवा पीढ़ी को साहित्य से जोड़ने, पुस्तक प्रकाशन, साहित्यिक आयोजनों को बढ़ावा देने तथा रचनाकारों के सम्मान से जुड़े कई महत्वपूर्ण सुझाव मुख्यमंत्री के समक्ष रखे। मुख्यमंत्री ने सभी सुझावों को गंभीरता से सुनते हुए उन्हें सकारात्मक रूप से लागू करने का भरोसा दिलाया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने के लिए सरकार निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने विश्वास जताया कि साहित्यकारों और बुद्धिजीवियों के सहयोग से राज्य की सांस्कृतिक चेतना और अधिक मजबूत होगी तथा आने वाली पीढ़ियां अपनी जड़ों से जुड़ी रहेंगी।

उन्होंने यह भी कहा कि विकास और विरासत, दोनों को साथ लेकर आगे बढ़ना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। साहित्य समाज का दर्पण होता है और लेखक समाज को नई दिशा देने का कार्य करते हैं। इसलिए सरकार साहित्यकारों के सुझावों को नीति निर्माण में भी महत्व देती रहेगी।

इस अवसर पर उपस्थित लेखकों एवं साहित्यकारों ने मुख्यमंत्री के साथ खुले संवाद की पहल की सराहना करते हुए आशा व्यक्त की कि ऐसे कार्यक्रम भविष्य में भी आयोजित किए जाएंगे, जिससे साहित्य, संस्कृति और समाज के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो सके।

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