जलभराव के स्थायी समाधान के लिए ड्रेनेज प्लान तैयार करने के निर्देश, संवेदनशील क्षेत्रों की नियमित निगरानी पर जोर
रुद्रप्रयाग, 16 अगस्त। कैबिनेट मंत्री एवं आपदा प्रबंधन व पुनर्वास मंत्री मदन कौशिक ने रविवार को रुद्रप्रयाग पहुंचकर जिला कार्यालय सभागार में आपदा प्रबंधन, मानसून तैयारियों, पुनर्वास कार्यों और श्री केदारनाथ धाम यात्रा व्यवस्थाओं की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को मानसून और आपदा की संवेदनशीलता को देखते हुए अलर्ट मोड पर रहने तथा आपसी समन्वय और टीम भावना के साथ तेजी से कार्य करने के निर्देश दिए।
बैठक में मंत्री ने जिले के संवेदनशील क्षेत्रों, बंद एवं बाधित सड़क मार्गों, उपलब्ध मशीनरी, राहत एवं खोज-बचाव दलों की स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, डीडीआरएफ और क्यूआरटी की उपलब्धता, हेलीपैडों की स्थिति, मानसून से क्षतिग्रस्त परिसंपत्तियों, आरवीएनएल की निर्माणाधीन सुरंगों, आपदा प्रबंधन बजट के व्यय तथा केदारनाथ पैदल मार्ग और यात्रा व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की।
लंबे समय से बंद सड़कों पर जताई नाराजगी
लंबे समय से बंद पड़े सड़क मार्गों को लेकर मंत्री ने नाराजगी जताते हुए संबंधित विभागों को प्राथमिकता के आधार पर मार्ग शीघ्र खोलने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आपदा से निपटने के लिए सरकार की ओर से आवश्यक संसाधन और बजट उपलब्ध कराया जा रहा है। ऐसे में राहत, बचाव और पुनर्स्थापना कार्यों में किसी भी स्तर पर अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने सभी उप जिलाधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में सड़क मार्गों और महत्वपूर्ण परिसंपत्तियों की नियमित निगरानी करने को कहा। सड़क पर मलबा आने या मार्ग क्षतिग्रस्त होने की स्थिति में इंपैनल की गई मशीनों को तत्काल मौके पर भेजने तथा मशीनरी और उपकरणों की लोकेशन की अद्यतन जानकारी रखने के निर्देश दिए।
जलभराव के स्थायी समाधान के लिए बनेगा ड्रेनेज प्लान
बैठक में अगस्त्यमुनि, तिलवाड़ा सहित विभिन्न बाजार क्षेत्रों में जलभराव की समस्या पर भी विस्तार से चर्चा हुई। मंत्री ने संबंधित विभागों को प्रभावी ड्रेनेज प्लान तैयार कर स्थायी समाधान की कार्ययोजना प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि मानसून के दौरान जल निकासी की पर्याप्त व्यवस्था पहले से सुनिश्चित की जाए, ताकि स्थानीय लोगों के साथ-साथ केदारनाथ यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं और अन्य यात्रियों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
पेयजल, बिजली और सार्वजनिक परिसंपत्तियों की भी समीक्षा
मदन कौशिक ने जिले में पेयजल एवं विद्युत आपूर्ति, सिंचाई नहरों, आयुष अस्पतालों, पंचायत भवनों सहित अन्य सार्वजनिक परिसंपत्तियों की स्थिति की भी जानकारी ली। उन्होंने आपदा से प्रभावित विद्यालयों और अन्य संस्थानों की क्षतिग्रस्त परिसंपत्तियों का समयबद्ध आकलन कर पुनर्स्थापना कार्य जल्द शुरू करने के निर्देश दिए।
‘आपदा प्रबंधन में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं’
मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार आपदा प्रबंधन को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। संभावित आपदाओं से निपटने के लिए लगातार प्रशिक्षण, मॉक ड्रिल और विशेषज्ञों की सहायता से तैयारियों को मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आपदा की स्थिति में भारतीय सेना, एनडीआरएफ और अन्य केंद्रीय एजेंसियों का भी महत्वपूर्ण सहयोग मिलता है।
उन्होंने अधिकारियों को खराब मौसम के दौरान लगातार निगरानी बनाए रखने और किसी भी आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि मानसून के दौरान राहत एवं बचाव कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
मंत्री ने कहा कि संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी, पर्याप्त मशीनरी की उपलब्धता, त्वरित राहत एवं बचाव कार्य और बाधित मार्गों को शीघ्र सुचारू करना सभी संबंधित विभागों की प्राथमिकता होनी चाहिए। आमजन और यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए गए।
जनप्रतिनिधि और अधिकारी रहे मौजूद
बैठक में केदारनाथ विधायक आशा नौटियाल, जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम कठैत, भाजपा जिलाध्यक्ष भारत भूषण भट्ट, पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष महावीर पंवार, जिला पंचायत सदस्य गंभीर सिंह, जिलाधिकारी विशाल मिश्रा, पुलिस अधीक्षक नीहारिका तोमर, मुख्य विकास अधिकारी राजेंद्र सिंह रावत, अपर जिलाधिकारी श्याम सिंह राणा, उप जिलाधिकारी ऊखीमठ अनिल रावत, उप जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग सोहन सिंह सैनी, उप जिलाधिकारी जखोली भगत सिंह फोनिया, जिला विकास अधिकारी मनविंदर कौर, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. पारुल गोयल, अधिशासी अभियंता राष्ट्रीय राजमार्ग ओंकार पांडे सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
