टनकपुर में स्टॉकिंग और साइबर स्टॉकिंग से बचाव को लेकर आयोजित हुआ एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम
विकासनगर। राष्ट्रीय महिला आयोग के सहयोग से उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की ओर से शनिवार को डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम राजकीय प्रौद्योगिकी संस्थान, टनकपुर (चंपावत) के सभागार में स्टॉकिंग एवं साइबर स्टॉकिंग की रोकथाम और जागरूकता विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। मंच संचालन कल्पना आर्य ने किया।
कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने कहा कि यह कार्यक्रम नारी सुरक्षा, सम्मान और डिजिटल जागरूकता को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि तकनीक के विस्तार के साथ अपराधों का स्वरूप भी बदला है। अब पीछा करने, धमकी देने और परेशान करने जैसी घटनाएं डिजिटल माध्यमों से भी की जा सकती हैं। उन्होंने छात्राओं और महिलाओं से किसी भी प्रकार के उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाने और उपलब्ध कानूनी एवं सहायता तंत्र का उपयोग करने का आह्वान किया।
कुसुम कंडवाल ने कहा कि महिलाओं को डिजिटल रूप से जागरूक और आत्मनिर्भर बनाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार की महिला सशक्तिकरण से जुड़ी योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि महिलाओं की आर्थिक, सामाजिक और प्रशासनिक भागीदारी बढ़ाने के लिए विभिन्न स्तरों पर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि महिला आयोग पीड़ित महिलाओं की सहायता के लिए हरसंभव सहयोग उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
संस्थान के निदेशक प्रो. हरिद्वारी लाल मंडोरिया ने महिला आयोग की पहल की सराहना करते हुए कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म ने जीवन को आसान बनाया है, लेकिन साइबर स्टॉकिंग और निजता का उल्लंघन गंभीर चुनौतियां भी हैं। उन्होंने युवाओं से तकनीक का उपयोग ज्ञान, शिक्षा और नवाचार के लिए करने तथा किसी भी गलत गतिविधि की जानकारी मिलने पर जिम्मेदारी के साथ सहयोग करने की अपील की।
कार्यक्रम में राज्य मंत्री किरण देवी और राज्य मंत्री हेमा जोशी ने भी संबोधित किया। उन्होंने कहा कि सीमांत क्षेत्र की छात्राओं को साइबर सुरक्षा, डिजिटल सतर्कता और विधिक अधिकारों की जानकारी देना समय की आवश्यकता है। ऐसी कार्यशालाएं छात्राओं में आत्मविश्वास बढ़ाने और उन्हें सुरक्षित डिजिटल व्यवहार के प्रति जागरूक करने में मदद करती हैं।
विशेषज्ञों ने दिए साइबर सुरक्षा के व्यावहारिक सुझाव
तकनीकी सत्र में पुलिस उपनिरीक्षक कमलेश भट्ट ने स्टॉकिंग और साइबर स्टॉकिंग के दुष्प्रभावों तथा उनसे बचाव के उपायों की जानकारी दी। उन्होंने फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट, अनचाही ऑनलाइन ट्रैकिंग, सोशल मीडिया फ्रॉड और डिजिटल उत्पीड़न से बचने के तरीके बताए। साथ ही साइबर सेल और संबंधित हेल्पलाइन के माध्यम से शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया भी समझाई।
उप जिला चिकित्सालय की सर्जन डॉ. प्रभा जोशी ने स्टॉकिंग, साइबर स्टॉकिंग और सोशल मीडिया के दबाव से होने वाले मानसिक तनाव, चिंता और अन्य मानसिक स्वास्थ्य संबंधी प्रभावों पर जानकारी दी। उन्होंने युवाओं को डिजिटल संतुलन बनाए रखने और मानसिक परेशानी होने पर समय पर चिकित्सकीय सलाह लेने के लिए प्रेरित किया।
महिला हेल्पलाइन प्रभारी उपनिरीक्षक सिमरन ने सोशल मीडिया पर निजी जानकारी, फोटो, लोकेशन और पासवर्ड सुरक्षित रखने के व्यावहारिक उपाय बताए। उन्होंने प्राइवेसी सेटिंग्स और टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन के उपयोग की जानकारी देते हुए डिजिटल उत्पीड़न की स्थिति में पुलिस और महिला हेल्पलाइन से संपर्क करने की अपील की।
वन स्टॉप सेंटर चंपावत की केंद्र प्रशासिका एवं अधिवक्ता ऋतु सिंह ने महिलाओं के लिए उपलब्ध विधिक सहायता तंत्र और शिकायत प्रक्रिया की जानकारी दी। उन्होंने वन स्टॉप सेंटर के माध्यम से महिलाओं को उपलब्ध चिकित्सकीय, कानूनी, मनोवैज्ञानिक और आश्रय संबंधी सहायता की प्रक्रिया भी समझाई।
कार्यक्रम के दौरान उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने लाभार्थियों को महालक्ष्मी किट भी वितरित की। कार्यक्रम का समापन आयोग की उपाध्यक्ष सायरा बानो के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।
इस अवसर पर राज्य महिला आयोग की सदस्य रचना जोशी, जिला कार्यक्रम अधिकारी बृजवाल प्रकाश, निजी सचिव आधार वर्मा, रुचि धस्माना, दीपा जोशी, सुनीता मुरारी, बबीता गोस्वामी, तुलसी कुंवर, रीता कुलकोड़िया, सरोज चंद, बाल विकास परियोजना अधिकारी राजेंद्र बिष्ट और मोहन बिष्ट सहित संस्थान के शिक्षकगण, पुलिस-प्रशासन के अधिकारी तथा बड़ी संख्या में छात्राएं मौजूद रहीं।
