एआई के वैश्विक मंच पर गूंजी भारतीय संस्कृति की आवाज

हरिद्वार, 6 जून (चंद्रप्रकाश बहुगुणा)। अखिल विश्व गायत्री परिवार के युवा प्रतिनिधि एवं देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पंड्या इन दिनों जन्मशताब्दी वर्ष का संदेश लेकर कनाडा प्रवास पर हैं। इस दौरान वे कनाडा के प्रबुद्ध वर्ग, सामाजिक संगठनों, शिक्षाविदों तथा राजनीतिक क्षेत्र से जुड़े लोगों के बीच युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य के विचारों को समकालीन संदर्भों में प्रभावी ढंग से प्रस्तुत कर रहे हैं।

इसी क्रम में कनाडा के टोरंटो में विश्वप्रसिद्ध बहुराष्ट्रीय परामर्शदाता संस्था डेलॉयट द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी ‘रिस्पॉन्सिबल एआई : डायलॉग विद ग्लोबल थिंकर्स’ में डॉ. चिन्मय पंड्या ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के विकास में नैतिकता, उत्तरदायित्व और मानवीय मूल्यों की अनिवार्य भूमिका पर अपने विचार रखे।

अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि तकनीकी प्रगति तभी सार्थक और स्थायी हो सकती है, जब वह मानव कल्याण, संवेदनशीलता और वैश्विक उत्तरदायित्व के साथ जुड़ी हो। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता मानव जीवन को नई संभावनाएं प्रदान करने की क्षमता रखती है, लेकिन यदि इसे नैतिक मूल्यों और सामाजिक उत्तरदायित्व से अलग कर दिया जाए तो इसके परिणाम गंभीर और चिंताजनक हो सकते हैं।

डॉ. पंड्या ने भारतीय वैदिक दर्शन तथा ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की अवधारणा का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति ने सदैव ज्ञान और विज्ञान को लोकमंगल का माध्यम माना है। यही दृष्टिकोण आज कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे उभरते और प्रभावशाली क्षेत्रों में भी अत्यंत प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि करुणा, संवेदनशीलता और नैतिक चेतना से युक्त तकनीक ही मानवता के लिए वास्तविक रूप से उपयोगी, सुरक्षित और कल्याणकारी सिद्ध हो सकती है।

उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि एआई के विकास में केवल तकनीकी दक्षता ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसमें मानवीय मूल्यों का समावेश भी आवश्यक है। एआई को मानव-केंद्रित बनाकर ही भविष्य की चुनौतियों का समाधान किया जा सकता है।

संगोष्ठी में उपस्थित अनेक अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने भी इस विचार का समर्थन किया कि एआई के सुरक्षित, उत्तरदायी और कल्याणकारी भविष्य के निर्माण में भारतीय मूल्य-आधारित दृष्टिकोण महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

इस वैश्विक संवाद में एआई क्षेत्र के कई प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने सहभागिता की। इनमें ग्लोबल एआई रिस्क इनिशिएटिव एट सीआईजीआई के कार्यकारी निदेशक डंकन कैस-बेग्स, डेलॉयट की डेटा एंड एनालिटिक्स स्ट्रेटेजी लीडर प्रीति शिवपुरी तथा हेल्थकेयर जनरेटिव एआई के ग्लोबल हेड नीरज डालमिया प्रमुख रूप से शामिल रहे।

संगोष्ठी में एआई के नैतिक उपयोग, संभावित जोखिमों, वैश्विक नियमन तथा मानव हितों के संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक चर्चा हुई। भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों पर आधारित डॉ. चिन्मय पंड्या के विचारों को प्रतिभागियों ने विशेष रुचि और सराहना के साथ सुना।

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