हरिद्वार,
चैत्र नवरात्र के पावन अवसर पर गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में आयोजित नौ दिवसीय विशेष साधना सत्र का आज भावपूर्ण एवं विधिवत समापन हो गया। इस आध्यात्मिक अनुष्ठान में देश-विदेश से आए हजारों साधकों ने सहभागिता कर पूरे परिसर को भक्ति, अनुशासन और साधना के अद्भुत वातावरण से सराबोर कर दिया।
नौ दिनों तक चले इस विशेष साधना क्रम में साधकों ने नियमित रूप से जप, तप, ध्यान एवं हवन के माध्यम से आत्मशुद्धि के साथ-साथ विश्वकल्याण की कामना की। सामूहिक साधना के अंतर्गत विश्व शांति, सद्भाव और सकारात्मक ऊर्जा के प्रसार हेतु विशेष आध्यात्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया।
शांतिकुंज स्थित यज्ञशाला में प्रतिदिन हवन संपन्न हुआ, जिसमें पर्यावरण शुद्धि और वैश्विक संतुलन की भावना प्रमुख रही। साधकों ने अपने अनुभव साझा करते हुए इस साधना को जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने वाला और अत्यंत प्रेरणादायक बताया।
इस अवसर पर संस्था की अधिष्ठात्री शैलदीदी ने अपने संदेश में कहा कि नवरात्र आत्मजागरण का पर्व है, जो व्यक्ति को अपनी कमजोरियों को पहचानकर उन्हें दूर करने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि सच्ची साधना वही है, जो व्यक्ति को सेवा, संवेदना और मानवता के मार्ग पर अग्रसर करे।
विदाई सत्र को संबोधित करते हुए शांतिकुंज के व्यवस्थापक योगेन्द्र गिरि ने कहा कि नवरात्र साधना व्यक्ति के भीतर निहित दिव्य शक्तियों को जागृत करने का श्रेष्ठ अवसर है। यह केवल धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं, बल्कि आत्मपरिष्कार और जीवन को श्रेष्ठ दिशा देने की एक सशक्त प्रक्रिया है।
कार्यक्रम के समापन पर सभी साधकों को भावभीनी विदाई दी गई तथा उन्हें पुनः साधना हेतु आमंत्रित किया गया। पूरे आयोजन ने साधकों के मन में नई ऊर्जा, प्रेरणा और सकारात्मक सोच का संचार किया।
