वर्तमान वैश्विक संकट में ऊर्जा संरक्षण बना अनिवार्य : डॉ. चिन्मय पण्ड्या

हरिद्वार, चंद्रप्रकाश बहुगुणा
वर्तमान समय में दुनिया के कई हिस्सों में बढ़ते युद्ध और वैश्विक तनाव के कारण ऊर्जा संसाधनों को लेकर अनिश्चितता का माहौल बनता जा रहा है। ऐसे हालात में ऊर्जा का संरक्षण और उसका विवेकपूर्ण उपयोग समय की सबसे बड़ी जरूरत बन गया है।

इन विचारों को व्यक्त करते हुए अखिल विश्व गायत्री परिवार के युवा प्रतिनिधि और Dev Sanskriti Vishwavidyalaya के प्रतिकुलपति Dr. Chinmay Pandya ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए ऊर्जा के सीमित संसाधनों का संतुलित और जिम्मेदार उपयोग करना बेहद जरूरी हो गया है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते तनाव, विशेष रूप से Iran और Israel के बीच जारी संघर्ष के चलते कई तेल भंडारों को नुकसान पहुंचने की खबरें सामने आ रही हैं, जिससे आने वाले समय में तेल की कमी की आशंका बढ़ सकती है।

डॉ. पण्ड्या ने कहा कि यदि अभी से ऊर्जा संरक्षण की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में दुनिया को गंभीर ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने बताया कि युगऋषि Pandit Shriram Sharma Acharya ने वर्षों पहले ही मानव समाज को चेताया था कि आने वाले समय में ऊर्जा और प्राकृतिक संसाधनों की बचत करना अनिवार्य होगा। आचार्यश्री ने अपने साहित्य और विचारों के माध्यम से सादगीपूर्ण जीवनशैली अपनाने, संसाधनों के संयमित उपयोग तथा प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर जीवन जीने का संदेश दिया था, जो आज और भी अधिक प्रासंगिक हो गया है।

डॉ. पण्ड्या ने कहा कि ऊर्जा संरक्षण केवल सरकार या संस्थाओं की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह प्रत्येक नागरिक का नैतिक कर्तव्य भी है। यदि लोग अपने दैनिक जीवन में छोटी-छोटी आदतों में बदलाव लाएं, तो बड़ी मात्रा में ऊर्जा की बचत की जा सकती है।

उन्होंने सुझाव दिया कि अनावश्यक बिजली उपकरणों को बंद रखना, ऊर्जा दक्ष उपकरणों का उपयोग करना, सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना, सौर ऊर्जा और अन्य नवीकरणीय स्रोतों को अपनाना जैसे उपाय ऊर्जा संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

डॉ. पण्ड्या ने लोगों से आह्वान किया कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए ऊर्जा संरक्षण को एक जनआंदोलन का रूप दिया जाए। उन्होंने कहा कि सामूहिक प्रयासों से ही ऊर्जा संसाधनों की सुरक्षा संभव है और इससे आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित, संतुलित और उज्ज्वल भविष्य सुनिश्चित किया जा सकता है।

 

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