उत्तराखंड: कैबिनेट में चमोली की झोली फिर खाली, लोगों में मायूसी — दस साल से नेतृत्व विहीन जनपद

देहरादून/चमोली। उत्तराखंड मंत्रिमंडल विस्तार के बाद एक बार फिर चमोली जनपद को कोई प्रतिनिधित्व न मिलने से स्थानीय लोगों में गहरी मायूसी देखने को मिल रही है। लंबे समय से कैबिनेट में हिस्सेदारी की उम्मीद लगाए बैठे चमोली वासियों को इस बार भी निराशा हाथ लगी है।

राज्य में मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami के नेतृत्व में हुए मंत्रिमंडल विस्तार में क्षेत्रीय संतुलन साधने की कोशिश तो की गई, लेकिन चमोली को नजरअंदाज किए जाने के आरोप लग रहे हैं। स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि पिछले लगभग दस वर्षों से जनपद को कोई प्रभावशाली कैबिनेट स्तर का नेतृत्व नहीं मिला है, जिससे विकास कार्यों की गति भी प्रभावित हुई है।

चमोली, जो कि सामरिक, धार्मिक और पर्यटन दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण जिला है, लंबे समय से राजनीतिक उपेक्षा का सामना कर रहा है। यहां के लोगों का मानना है कि कैबिनेट में प्रतिनिधित्व न होने से उनकी समस्याएं सरकार तक प्रभावी ढंग से नहीं पहुंच पाती हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, बार-बार की अनदेखी से स्थानीय स्तर पर असंतोष बढ़ सकता है, जिसका असर आगामी चुनावों में देखने को मिल सकता है। वहीं विपक्ष ने भी इस मुद्दे को लेकर सरकार को घेरना शुरू कर दिया है और इसे क्षेत्रीय असंतुलन का उदाहरण बताया है।

स्थानीय संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने सरकार से मांग की है कि भविष्य में चमोली को उचित प्रतिनिधित्व दिया जाए, ताकि जनपद के विकास को नई गति मिल सके और लोगों का भरोसा कायम रहे।

कुल मिलाकर, मंत्रिमंडल विस्तार के बाद चमोली की झोली फिर खाली रहना राज्य की राजनीति में एक बड़ा सवाल खड़ा करता है, और यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस असंतोष को किस तरह संतुलित करती है।

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