तिलाड़ी दिवस पर अमर शहीदों को श्रद्धांजलि, संवाद और एकता का दिया संदेश
डीएम और विधायक बोले— पुरखों के बलिदान से प्रेरणा लेकर मिलजुलकर मजबूत बनाएं उत्तराखंड
उत्तरकाशी/बड़कोट, 30 मई | चंद्रप्रकाश बहुगुणा
रंवाई क्षेत्र के उन अमर शहीदों को शनिवार को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई, जिन्होंने राजशाही के अन्याय के विरुद्ध अपने अधिकारों और जनहित की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया था। तिलाड़ी दिवस के अवसर पर तिलाड़ी शहीद स्थल पर आयोजित कार्यक्रम में जिलाधिकारी प्रशांत आर्य और विधायक संजय डोभाल ने शहीद स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया।
नगर पालिका बड़कोट द्वारा आयोजित कार्यक्रम में शहीदों के परिजनों को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर वक्ताओं ने तिलाड़ी कांड को उत्तराखंड के इतिहास का गौरवशाली अध्याय बताते हुए कहा कि यह केवल एक आंदोलन नहीं, बल्कि अन्याय के खिलाफ जनशक्ति और अधिकारों की लड़ाई का प्रतीक है।
जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने कहा कि तिलाड़ी का इतिहास हमें संवाद और सहमति की ताकत का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि चाहे राजशाही का दौर रहा हो या वर्तमान लोकतांत्रिक व्यवस्था, हर समस्या का समाधान बातचीत और आपसी समझ से ही संभव है। जब संवाद के रास्ते बंद होते हैं, तभी संघर्ष और आंदोलन जन्म लेते हैं। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपने पूर्वजों के साहस, संघर्ष और बलिदान से प्रेरणा लें।
विधायक संजय डोभाल ने कहा कि रंवाई के शहीदों का बलिदान प्रदेश की आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करता रहेगा। उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक स्थल का और अधिक विकास किया जाएगा, ताकि यहां आने वाले लोग तिलाड़ी आंदोलन और शहीदों के संघर्ष को करीब से जान सकें।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने समाज को संदेश देते हुए कहा कि तिलाड़ी हमें अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने, अन्याय के खिलाफ शांतिपूर्ण ढंग से आवाज उठाने और संवाद के माध्यम से समस्याओं का समाधान खोजने की सीख देता है। समाज तभी मजबूत बनता है जब लोग एक-दूसरे के साथ मिलकर चलें और मतभेदों को संवाद के जरिए दूर करें।
इस अवसर पर ओबीसी आयोग के उपाध्यक्ष श्याम डोभाल, नगर पालिका अध्यक्ष विनोद डोभाल, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष जशोदा राणा सहित अनेक जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।
तिलाड़ी का बलिदान आज भी हमें याद दिलाता है कि अधिकारों की रक्षा के लिए जागरूकता, एकता और संवाद सबसे बड़ी शक्ति हैं।
